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तभी अचानक भाभी का शरीर अकड़ने लगा उनकी चूत ज़ोरदार तरीके से झड़ने लगी। मैंने चूत को चाटकर साफ कर दिया और जैसे ही मैं भाभी के ऊपर आने को हुआ, भाभी ने मुझे रोका और गेस्ट-रूम की ओर इशारा किया। मैं समझ गया कि वह उस कमरे में चलने को कह रही है। मैंने उन्हें गोद में लिया और चूमते हुए उस कमरे में ले आया। लाईट जलाई तो देखा, वहाँ एक सिंगल बेड था। मैंने पंखा चालू किया और उन्हें बिस्तर पर पटक दिया और उनके ऊपर आ गया। मैंने उनके होंठों को चूमते हुए अपनी टाँगों से उनकी टाँगे चौड़ी कीं। अब मेरा लंड भाभी की चूत के ऊपर था। मैंने अपने हाथों को सीधा किया और धक्के मारने की मुद्रा में आ गया। अब मैं अपनी कमर को नीचे करता और लंड को चूत से स्पर्श करते ही ऊपर कर लेता। कुछ देर ऐसा करने के बाद भाभी बोली,”अब मत तड़पाओ, मेरी चूत में आग लग रही है, इसमें अपना लंड अब डाल दो और मेरी चूत की आग को शान्त करो, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ। इस बार मैंने लण्ड चूत पर रखा और धीरे-धीरे नीचे होने लगा और लण्ड चूत की गहराईयों में समाने लगा। चूत बिल्कुल गीली थी, एक ही बार में लण्ड जड़ तक चूत में समा गया और हमारी झाँटे आपस में मिल गईं। अब मेरे झटके शुरु हो गए और भाभी की सिसकियाँ भी…भाभी आआआहहहहह अअआआआआहहहह करने लगी। कमरा उनकी सिसकियों से गूँज रहा था। जब मेरा लण्ड उनकी चूत में जाता तो फच्च-फच्च और फक्क-फक्क की आवाज़ होती। मेरा लण्ड पूरा निकलता और एक ही झटके मे चूत में पूरा समा जाता। भाभी भी गाँड हिला-हिला कर मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी, अब तो खाट भी चरमराने लगी थी। पर मेरी गति बढ़ती जा रही थी। हम दोनों पसीने से नहा रहे थे। पंखे के चलने का कोई भी प्रभाव नहीं था। दोनों के चेहरे एकदम लाल हो रहे थे पर हम रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। झटके अनवरत जारी थे। कभी मैं भाभी के ऊपर तो कभी भाभी मेरे ऊपर आ जाती। दोनों ही चुदाई का भरपूर मज़ा ले रहे थे। पूरे कमरे में बस कामदेव का राज था। हम दोनों एक-दूसरे की आग को बुझा रहे थे। तभी हमारे शरीर अकड़ने लगे। दोनों झड़ने वाले थे। मैं लण्ड को बाहर निकालने वाला ही था कि भाभी ने रोक दिया और बोली – “अपना सारा माल चूत के अन्दर ही छोड़ दो।” मैंने भी झटके चालू रखे। हम दोनों ने एक-दूसरे को भींच लिया। भाभी ने टाँगों और हाथों को मेरे शरीर पर लपेट दिया। मैंने भाभी के कंधों को कसकर पकड़ लिया और एक ज़ोरदार झटका मारा। मैं और भाभी एक ही साथ झड़े थे। भाभी की चूत मेरे वीर्य से भर गई। वीर्य चूत से बह रहा था। मेरा मुँह अपने-आप चूत पर पहुँच गया और मैं भाभी की चूत को चाट-चाट कर साफ करने लगा। भाभी ने भी मेरे लंड को चूस-चूस कर साफ कर दिया और हम दोनों एक-दूसरे के बगल में लेट गए, पर भाभी का हाथ मेरे लंड पर था और मैं भाभी के बालों को सहला रहा था। भैया के आने तक मैं और भाभी पति-पत्नी की तरह रहे। मैं सुबह को दुकान का एक चक्कर लगा आता। दिन में हम नींद ले लेते और रात को…I will wait for your email id to aapko pata hee hai [email protected]मेरी भाभी अपेक्षा जो लगभग ३२ साल की है और दो बच्चों की माँ है, रंग गोरा, शरीर भरा हुआ, न एकदम दुबला न एक दम मोटा-ताज़ा। मतलब बिल्कुल गज़ब की। पर चूचियाँ तो दो-दो किलो के और गाँड कुछ ज़्यादा ही बाहर निकले हैं। मेरे ख़्याल से उसकी फिगर ३८-३२-३९ होगी। मैं उस भाभी को चोदने के चक्कर में दो सालों से लगा था, और उसके नाम से मूठ मारा करता था। मेरे भैया (४०), जो ग्वालियर में ही रहते थे, रेडीमेड कपड़ों के धंधे में थे और अपना माल दिल्ली ख़ुद ही जाकर लेकर आते थे। एक दिन जब मैं अपने घर पहुँचा तो भैया वहाँ थे, और मम्मी से बातें कर रहे थे। मैंने भैया से पूछा – “अब नये कपड़े कब आ रहे हैं?Aur mera haath pakad ke sehlane laga aur meujh se kehne laga”Samita I love You.”Maine uski ankho mein ankhe dalke kaha”i love you too”.Usne dheere se mujhe apni aur kheenchte hue apni bahoon mein bhar liya aur kehne laga tum nahi janti k mein tumhe kitna chahta tumhare bina jee nahi bahut bahut sundar ho.” “बस आज ही लाने जा रहा हूँ। पर इस बार माल दिल्ली से नहीं, मुम्बई से लेकर आना है। वहाँ एक नामी कम्पनी से मेरी बात तय हो गई है। मुझे वहाँ से आने में चार-पाँच दिन तो लग ही जाएँगे। तब तक मैं चाहता हूँ कि तुम दिन में एक बार ज़रा दुकान जाकर काम देख लेना और रात में मेरे घर चले जाना।” “तू अपेक्षा और बच्चों को यहीं क्यों नहीं छोड़ देता?

Aapne pichli story mein padha k kaise mere mama ke ladke ne meri jawani ka ras pia aur mujhe jannat ka majaa dilaya.

Uska lund meri gaand aur chut pe tkraa raha main kiss karte hue uski choti si chuchi ko choosne kahaa”HAAN darling chooso inko..majaa aa raha hai.” Who siskian le rahaa thaa..meine thodi der uski chuchi chosi.

Phir uske badan ko kis karte hue uske land tak pahunch saanse ek dam aur tej ho gayi.uskaa lund ek dam tanaa hua jaise keh rahaa ho.” Rani dekh kya rahi ho choos dalo mujhe !

’ मैं जाकर भाभी के पास लेट गया, भाभी एकदम गहरी नींद में थी। मैंने एक हाथ भाभी के गले पर रख दिया और हाथ को नीचे खिसकाने लगा। अब मेरा हाथ ब्लाउज़ के हुक तक पहुँच गया। मैं आहिस्ते-आहिस्ते हुक खोलने लगा। तभी भाभी बच्चों की ओर पलट गई, इससे मुझे हुक खोलने में और भी आसानी हो गई और मैंने सारे हुक खोल दिए। ब्रा के ऊपर से ही भाभी की चूचियों को सहलाने लगा। भाभी के स्तन एकदम मुलायम थे। पर ब्रा ने उन्हें ज़ोरों से दबा रखा था, इस कारण ऊपर पकड़ नहीं बन रही थी। मैं अपना हाथ भाभी की ब्लाउज़ के पीछे ले गया और ब्रा के हुक को भी खोल दिया। अब दोनों स्तन एकदम स्वतंत्र थे। मैं उन आज़ाद हो चुके बड़े-बड़े स्तनों को हल्के-हल्के सहलाने लगा, फिर मैं एक हाथ उनकी जाँघ पर ले गया और ऊपर की ओर ले जाने लगा पर एक डर सा भी लग रहा था कि कहीं भाभी जाग ना जाए। पर जिसके लंड में आग लगी हो वो हर रिस्क के लिए तैयार रहता है और लंड की आग को सिर्फ चूत का पानी ही बुझा सकता है। हिम्मत करके मैं अपने हाथ को ऊपर ले जाने लगा। जैसे-जैसे मेरा हाथ चूत के पास जा रहा था, मेरा लंड और तेज़ हिचकोले मार रहा था। अब मेरा हाथ भाभी की पैन्टी तक जा पहुँचा था। पैन्टी के ऊपर से ही मैंने हाथ चूत के ऊपर रख दिया। चूत बहुत गीली थी और भट्टी की तरह तप रही थी। मैंने साड़ी को ऊपर कर दिया और पैन्टी को नीचे खिसकाने लगा। थोड़ी मेहनत के बाद मैं पैन्टी को टाँगों से अलग करने में कामयाब रहा। अब मैं हाथ को चूत के ऊपर ले गया और चूत को प्यार से सहलाने लगा। भाभी अभी तक शायद गहरी नींद में थी। मैंने एक हाथ भाभी की कमर पर रखा और उन्हें सीधा करने लगा। भाभी एक ही झटके से सीधी हो गई। मैं अपनी टाँग को भाभी की टाँगों के बीच ले गया और भाभी की टाँगों को फैला दिया। अब मैं नीचे खिसकने लगा और मैं जैसे ही चूत चाटने के लिए मुँह चूत के पास ले गया, भाभी ने हाथ से चूत को ढँक लिया। मेरी तो गाँड फट गई, रॉड की तरह तना हुआ लौड़ा एकदम मुरझा गया, दिल धाड़-धाड़ धड़कने लगला। तभी भाभी उठी और फुसफुसाकर बोली,”ये सब यहाँ नहीं। अनु और मोनू जाग सकते हैं। अब तक तो मैंने किसी तरह अपनी सिसकियाँ रोक रखीं थीं पर अब नहीं रोक सकूँगी। हम ड्राईंगरूम में चलते हैं।” इतना सुनते ही मेरा लंड फिर से क़ुतुबमीनार बन गया। भाभी जैसे ही बिस्तर पर से उठी, मैंने भाभी को अपनी बाँहों में भर लिया और उनके होंठों को चूमने लगा। वह भी मेरे होंठों पर टूट पड़ी। हम एक-दूसरे के होंठों को पागलों की तरह निचोड़ने लगे। मैं उनके होंठों को चूमते हुए अपने दोनों हाथ उनकी गांड तक ले गया और उन्हें उठा लिया। भाभी ने अपने पैर मेरी कमर के गिर्द लपेट दिए। मैं उन्हें चूमते हुए ड्राईंगरूम तक ले आया और भाभी को लेकर सोफे पर बैठ गया। भाभी मेरी गोद में थी, ब्लाउज़ और ब्रा अभी भी भाभी के कंधों से लटक रहे थे। पहले मैंने ब्लाउज़ को निकाल फेंका, फिर ब्रा और एक चूची को हाथ से मसलने लगा और साथ ही दूसरी चूची को चाटने लगा। अब साड़ी की बारी थी, मैंने साड़ी भी निकाल फेंकी, अब पेटीकोट बेचारे का भी शरीर पर क्या काम था। अब भाभी एकदम नंगी हो चुकी थी। लाल नाईट-बल्ब की रोशनी में भाभी का नंगा बदन पूर्णिमा में ताज़ की तरह चमक रहा था और इस वक्त मैं इस ताजमहल का मालिक था। अब भाभी मेरे कपड़े उतारने लगी। मेरे सारे कपड़े उन्होंने उतार दिए और मैं सिर्फ अपनी फ्रेंची अण्डरवियर में रह गया पर वह भी अधिक देर न रह सका। उन्होंने वह भी एक ही झटके में उतार फेंकी और फिर भाभी ने मेरे साढ़े पाँच इंच लम्बे विकराल लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। कभी भाभी लंड पर, तो कभी अंडकोष से सुपाड़े तक जीभ फिराती, कभी लंड को हल्के से काटती, सुपाड़े पर थूकती और फिर उसे चाट जाती। मेरा तो बुरा हाल कर दिया और मेरे लंड ने भाभी के मुँह पर अपनी पिचकारी मार दी। उनका पूरा चेहरा मेरे वीर्य से सन गया था। मैंने अपने दोनों हाथों से सारा वीर्य उनके चेहरे पर मल दिया। “दूसरी बार में भी इतना माल? ” – भाभी ने कहा। मैं यह सुनकर हैरान हो गया, मेरी हैरानी जानकर उन्होंने बताया – “जब तू ब्लू-फिल्म देख रहा था और मेरे नाम से मूठ मार रहा था तब मैं पानी पीने के लिए रसोईघर में आई थी और तेरे लंड की धार को देख कर मेरी कामवासना की प्यास जाग गई और मैं बेडरूम में अपने कपड़ों को जान-बूझ कर अस्त-व्यस्त कर लेट गई थी। वहाँ आने के बाद अगर तू ऐसी हरकतें नहीं करता तो आज मैं ही तेरा बलात्कार कर देती।” “तरबूज़ तलवार पर गिरे या तलवार तरबूज़ पर, कटना तरबूज़ को ही है। अब तो आज रात सचमुच में बलात्कार होगा। आज रात अगर आपसे रहम की भीख न मँगवाई तो मेरा भी नाम नन्द नहीं।” मैंने कहा। “चल देखते हैं, कौन रहम की भीख माँगता है !

” भाभी ने भी ताना सा मारा। भाभी के ऐसा कहते ही मैंने भाभी को ज़मीन पर लिटा दिया और उनकी चूत पर टूट पड़ा, अपनी जीभ को चूत में जितना हो सकता था अन्दर डाल दिया और जीभ हिलाने लगा। चूत के गुलाबी दाने को जैसे ही मैं हल्के-हल्के काटता-चूसता, वह तड़प उठती और आआहहहहहह आआहह्ह्हहहह करने लगती। उसने टाँगों से मेरे सिर को जकड़ लिया और टाँगों से ही सिर को चूत में दबाने लगी और बालों में हाथ फेरने लगी। मैं चूत-अमृत पीते हुए दोनों स्तनों को मसल रहा था…

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